पलवल में बुज़ुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और पीढ़ियों के स्नेह का हुआ भव्य उत्सव
पलवल
“ख़्याल अपने बुजुर्गों का” सामाजिक पहल के 9वें संस्करण का, “संस्कारों की छांव में खिलता बचपन” थीम पर आधारित एक भव्य ज़िला स्तरीय कार्यक्रम का सफल आयोजन दक्ष फाउंडेशन द्वारा टैगोर पब्लिक स्कूल पलवल, जिला रैड क्रॉस सोसाइटी पलवल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, यथार्थ हॉस्पिटल एवं हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस के सहयोग से किया गया। यह कार्यक्रम वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, अधिकारों, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सहभागिता को समर्पित रहा तथा दादा–दादी और नाती–पोतों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का एक सशक्त मंच बना। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम रहे। रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव बिजेंद्र सोरौत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि दिव्यांश एवं दिव्या कालिया, जेएमआईसी ने विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। इस अवसर पर एवीएम एलएन शर्मा, एवीएसएम (सेवानिवृत्त) मुख्य सलाहकार (शिक्षा, नैतिकता एवं मूल्य आधारित शिक्षण); ब्रिगेडियर एनएन माथुर (सेवानिवृत्त) मुख्य सलाहकार (वरिष्ठ नागरिक देखभाल एवं कल्याण); कर्नल एके कपलास (सेवानिवृत्त) मुख्य सलाहकार (कौशल विकास) विंग कमांडर एचसी मान (सेवानिवृत्त) मुख्य सलाहकार (कानूनी साक्षरता); एसएस गोसाईं, मुख्य संरक्षक, एचपीएससी एवं निदेशक, डिवाइन पब्लिक स्कूल, फरीदाबाद, एचएस मलिक, पूर्व अध्यक्ष, सीडब्ल्यूसी फरीदाबाद एवं मुख्य सलाहकार (बाल कल्याण); प्रयास दलाल, निदेशक, दिल्ली स्कॉलर्स इंटरनेशनल स्कूल, फरीदाबाद; यथार्थ हॉस्पिटल से डॉ. विजय कुमार अग्रवाल (फेफड़ा रोग विशेषज्ञ), डॉ. हेमंत सहानी (ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ) सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक; एसएस दहिया, संस्थापक संयोजक, दक्ष फाउंडेशन; डॉ. रमेश डागर, प्रधान एजुकेटर क्लब, उधम अधाना, डायरेक्टर, सैनिक पब्लिक स्कूल बल्लभगढ़, अजीत डागर सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। टैगोर पब्लिक स्कूल की प्राचार्या दीपिका शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में बुज़ुर्गों की अमूल्य भूमिका को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे दादा–दादी की उपस्थिति, स्नेह और अनुभव को समझें व संजोकर रखें। उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक, सांस्कृतिक, खेल एवं रोबोटिक्स उपलब्धियों तथा देश–विदेश में कार्यरत पूर्व छात्रों की सफलताओं का उल्लेख किया। साथ ही टैगोर ग्रुप ऑफ स्कूल्स की निदेशिका मनोरमा अरोड़ा के 52 वर्षों के समर्पण, प्रतिबद्धता और दूरदृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विद्यालय ने यह प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने यह भी कहा कि घर के बुज़ुर्ग ही परिवार संस्था को पूर्णता देते हैं।कार्यक्रम में 344 से अधिक विद्यार्थियों एवं 400 से अधिक दादा–दादियों/नाना–नानियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि यथार्थ हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बुज़ुर्गों के लिए तत्काल निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान की गई।
अपने संबोधन में ब्रिगेडियर एन. एन. माथुर ने 'ख़्याल अपने बुजुर्गों का' पहल की अवधारणा, उद्देश्य एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध सेवाओं पर प्रकाश डाला। विंग कमांडर एचसी मान ने किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बच्चों की देखभाल, संरक्षण, विकास एवं पुनर्वास की कानूनी व्यवस्था को सरल शब्दों में समझाया। श्री रावत ने माता–पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण–पोषण एवं कल्याण अधिनियम के अंतर्गत बुज़ुर्गों के अधिकारों एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। एमएस दहिया ने अपने साइबर सुरक्षा संबोधन में वरिष्ठ नागरिकों को बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड से सतर्क रहने तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर पाँच श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार मुख्य अतिथि गौरव गौतम एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा वितरित किए।
ज़िला स्तरीय कार्यक्रम “खयाल अपने बुजुर्गों का” का मूल उद्देश्य समाज में बुज़ुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करना, उनकी देखभाल एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करना तथा उनके अधिकारों, स्वास्थ्य और सामाजिक सहभागिता के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाना है। यह कार्यक्रम एक सशक्त संदेश देता है कि बुज़ुर्ग समाज की धरोहर हैं और उनके अनुभव, मार्गदर्शन एवं स्नेह से ही संस्कारी, संवेदनशील और संतुलित भविष्य का निर्माण संभव है। “खयाल अपने बुजुर्गों का” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाला एक सामाजिक संकल्प है, जो प्रेम, सम्मान और सुरक्षा के साथ वरिष्ठ नागरिकों को समाज की मुख्यधारा में सशक्त रूप से स्थापित करता है।