आंचल छाया आश्रम ने किया आठ माह की उमा का पालन-पोषण, आज कर रही है मास्टर्स डिग्री
पलवल
कुदरत की मार से पीड़ित उमा को आंचल छाया आश्रम की शीतल छांव मिली तो उन्होंने स्वयं को साबित करते हुए एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित किया है। आज वे अपनी खुद की ट्रेवल एजेंसी चला रही हैं, जिसके माध्यम से वे पूरे भारतवर्ष में सेवाएं प्रदान कर रही हैं। उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने उमा के जज्बे, लगन व मेहनत की सराहना करते हुए उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया। उमा जब मात्र आठ माह की थी तो उन्हें कोई लावारिस अवस्था में टाउन पार्क फरीदाबाद में छोड़ गया था, जिसे पुलिस ने बरामद किया। पुलिस ने बच्ची को आर्य कन्या सदन में दाखिल कराया, जहांं से उन्हें बाद में पलवल स्थित आंचल छाया आश्रम में भेजा गया। आंचल छाया आश्रम में पली-बढ़ी उमा इन दिनों सोशल वर्क में मास्टर डिग्री कर रही है। साथ ही उन्होंने कुछ माह पूर्व ही टैप एंड ट्रिप्स के नाम से अपनी खुद की ट्रैवल एजेंसी स्थापित की। वे अब पूरे भारतवर्ष में अपनी ट्रेवल एजेंसी के माध्यम से सेवाएं प्रदान कर रही हैं। फिलहाल वे देश के अंदर ही एजेंसी के माध्यम से पर्यटकों को गाड़ियों व ठहरने की व्यवस्था करवा रही हैं। भविष्य में उनका प्रयास है कि वे विदेशों में भी अपने व्यापार का प्रसार करें। आश्रम से ही वे अपनी ट्रेवल एजेंसी संचालित कर रही हैं, जिसके लिए वे ऑनलाईन माध्यमों से प्रचार-प्रसार करती हैं। उमा ने बताया कि वे हिमाचल प्रदेश घूमने गई थी तो उन्हें ट्रैवल एजेंसी स्थापित करने का आइडिया आया। अपने आइडिया को उन्होंने चरितार्थ किया। आज वे एक सफल एजेंसी संचालित कर रही हैं, जिसके माध्यम से होने वाली आय से वे अपने आश्रम की भी आर्थिक मदद करती हैं। उनका कहना है कि आश्रम की संचालक संतोष माँ ने उन्हें बेटी की तरह पाला है। उन्होंने कहा कि आश्रम में लावारिस तथा अनाथ बच्चों का पालन-पोषण किया जाता है। अब पॉक्सो की पीड़िताओं को भी यहां रखा जाने लगा है। इनके पोषण व बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था के लिए वे सदैव प्रयासरत रहेंगी।
उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि उमा एक उदाहरण के रूप में सामने आई हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है, जिसके लिए धैर्य के साथ कठोर परिश्रम करना जरूरी है। उमा खुद को स्थापित करते हुए अपने आश्रम को भी मजबूती देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो सफलता अवश्य मिलती है। इस दौरान आश्रम की संचालक संतोष ने कहा कि आश्रम की बेटियां सफल होती हैं तो उन्हें बेहद खुशी मिलती है। ऐसी बेटियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सक्षम लोगों को हर संभव योगदान देना चाहिए।