केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संघों के आह्वान पर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रीय आम हड़ताल
पलवल
केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संघों के आह्वान पर सरकार की जनविरोधी एवं मजदूर, कर्मचारी व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रीय आम हड़ताल पलवल में सफल रही। हड़ताल की सफलता के लिए मजदूर व कर्मचारी संगठनों ने पूरी ताकत लगा दी थी। विभिन्न संगठनों के कर्मचारियों ने देवीलाल पार्क में इकट्ठे होकर प्रदर्शन करते हुए शहर में जलूस निकाला तथा सामान्य बस अड्डे पर जलूस का समापन किया। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जितेन्द्र तेवतिया, सीआईटीयू की जिला प्रधान रामरती चौहान, किसान नेता रूपराम तेवतिया, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला प्रधान बलजीत शास्त्री की अध्यक्षता में आयोजित प्रदर्शन का संचालन जिला सचिव हरेंद्र देशवाल ने किया। वन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष परमिंदर गुलिया व कर्मचारी नेता योगेश शर्मा, राकेश तंवर, योगेश शर्मा, जितेन्द्र चौहान, अशोक नागर, कृष्णा, सोनबती व जगबती डागर ने जलूस का नेतृत्व किया। विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और मजदूरों को संबोधित करते हुए सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जितेन्द्र तेवतिया व सीआईटीयू की जिला प्रधान रामरती चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूंजीपतियों के दबाव में 29 श्रम कानूनों को खत्म कर चार मजदूर विरोधी लेबर कोड्स बनाए हैं। यह मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज है, जिसको किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार 30 हजार रुपए न्यूनतम वेतन देने और माननीय हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद ठेका कर्मचारियों को पक्का करने की पॉलिसी बनाने को तैयार नहीं है। इसके विपरीत कच्चे कर्मचारियों को पूरी सेवा के लिए कच्चा रखने की पक्की गारंटी के लिए एचकेआरएन बनाया गया है। उन्होंने सवाल किया कि जॉब सिक्योरिटी देने की बजाय ठेका कर्मचारियों को रेगुलर क्यों नहीं किया जा रहा है? यूनियन नेताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली करने की बजाय सरकार ने जबरन यूपीएस लागू कर जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन दस हजार करने की भी अनदेखी की जा रही है। केन्द्र सरकार बिजली संशोधन बिल को बजट सत्र में पास कर बिजली वितरण प्रणाली को भी निजी हाथों में सौंपने जा रही है। इससे सब्सिडी और क्रॉस सब्सिडी खत्म हो जाएगी और बिजली की दरें बढ़ेंगी तथा बिजली गरीब और किसान की पहुंच से बाहर हो जाएगी। उन्होंने केंद्रीय बजट को मजदूर व कर्मचारी विरोधी व कारपोरेट परस्त करार दिया। उन्होंने मजदूरों और कर्मचारियों से कहा कि सरकार ने कर्मचारियों व मजदूरों तथा किसानों को करो या मरो की स्थिति में ला कर खड़ा कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता मास्टर महेन्द्र सिंह चौहान व उदय सिंह सरपंच ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय कृषि पर हमला बताया। समझौते में उल्लिखित शर्तें केंद्र सरकार द्वारा अमेरिकी कृषि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने किए गए पूर्ण आत्मसमर्पण को उजागर करती है। कार्यक्रम में किसान नेता दरियाब सिंह, सोहनपाल चौहान, धर्मचंद, राजकुमार डागर, अनिल कुमार, पवन कुमार, प्रेम सहरावत, गीता, ऊषा, सविता रावत, सतपाल करहाना, राकेश तंवर, सरजीत सौरौत, नरेंद्र सौरौत, योगेश पाठक, दीपक, देवीसिंह, सतपाल व कृष्ण कुमार ने भी शामिल होकर अपने विचार व्यक्त किए।