दहेज मुक्त विवाह को बढ़ावा दें युवा और अभिभावक - दहेज निषेध अधिकारी

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दहेज लेना, देना या दहेज के लिए उकसाना है दंडनीय अपराध

पलवल
एसडीएम एवं दहेज निषेध अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि भारत में दहेज प्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से लागू किया गया दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 महिलाओं की सुरक्षा के लिए ढाल का काम करता है। इस कानून के तहत दहेज लेना, देना या दहेज के लिए उकसाना एक दंडनीय अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम महिलाओं को दहेज से जुड़ी हिंसा, उत्पीड़न और शोषण से बचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। दहेज निषेध अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि कानूनन विवाह से पहले, विवाह के दौरान या विवाह के बाद किसी भी रूप में दहेज की मांग या लेन-देन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसमें नकद राशि, संपत्ति, आभूषण या कोई अन्य कीमती वस्तु शामिल हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति दहेज मांगता है, देता है या इसके लिए प्रेरित करता है, तो उसे अधिकतम 5 वर्ष तक की कैद और 15 हजार रुपये या दहेज की कीमत (जो अधिक हो) तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे दहेज मुक्त विवाह को बढ़ावा दें और एक समान, सम्मानजनक समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि दहेज से जुड़े मामलों में कानून काफी सख्त है। ऐसे अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे इस कानून के प्रति जागरूक रहें और किसी भी प्रकार की दहेज मांग या उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत प्रशासन या पुलिस को सूचित करें। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की सोच में बदलाव भी आवश्यक है। शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही इस कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
विवाह मे दहेज की मांग करने के कार्य को दंडित करती है। इसमें कम से कम छह महीने और अधिकतम पांच साल की सजा के साथ 15000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
धारा 3 और धारा 4 के तहत अपराध गैर-जमानती और संज्ञेय होंगे। उप-धारा (ए) उक्त अपराध करने से इनकार करने वाले व्यक्ति पर सबूत का भार डालकर इसे और अधिक मजबूत करती है।

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