प्रत्येक बच्चे को समान एवं गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उसका संवैधानिक अधिकार - विष्णु चौहान
पलवल
शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना है। शिक्षा किसी वर्ग विशेष का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। चाहे वह गरीब परिवार से हो या संपन्न परिवार से, उसे समान सम्मान, समान अवसर और समान गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त होनी चाहिए। यह वाक्य संबिधान के मौलिक अधिकार को लेकर प्रदेश के मीडिया संगठनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा के दौरान मिशन जॉर्नलिस्ट प्रोटेक्शन, भारत के अध्यक्ष विष्णु चौहान ने कहे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में आमजन के लिए समर्पित मीडिया से जुड़े लोगों ने संकल्प लिया कि आमजन के मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु अभियान चला, जिमेदार लोगों को जवाब देने के लिए विवश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के आकंलन चीख चीख कर बता रहे हैं कि वर्तमान समय में बढ़ती निजी शिक्षा व्यवस्था और ऊँची फीस के कारण आर्थिक आधार पर शिक्षा में असमानता बढ़ रही है। इससे समाज में अवसरों का अंतर भी बढ़ सकता है। इस पृष्ठभूमि में "राष्ट्रीय निजी विद्यालय पारदर्शिता अभियान" प्रारंभ किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसी संस्था का विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग उठाना है। उन्होंने कहा कि हम केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि निजी विद्यालयों के संबंध में लागू कानूनों एवं नियमों के अनुरूप एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच तंत्र गठित किया जाए, जो फीस निर्धारण, वित्तीय पारदर्शिता, वैधानिक अनुपालन, शिक्षकों के अधिकारों तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की निष्पक्ष समीक्षा करे। जो संस्थान नियमों का पालन कर रहे हैं, उन्हें सम्मानपूर्वक कार्य करने दिया जाए, जबकि नियमों के उल्लंघन के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि हम मांग करते हैं कि सरकार 30 दिनों के भीतर इस विषय पर ठोस कार्ययोजना घोषित करे तथा अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों के साथ व्यापक संवाद स्थापित करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था अधिक न्यायपूर्ण, पारदर्शी और उत्तरदायी बन सके। देशभर के अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और जागरूक नागरिकों से अपील है कि यदि उनके पास शिक्षा व्यवस्था से संबंधित किसी भी प्रकार की तथ्यात्मक शिकायत या दस्तावेज़ हैं, तो उन्हें संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें, जिससे तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।