आर्य समाज पलवल की वेद कथा में, पंडित नरेशदत्त ने दिया जीवन को सुखी बनाने का संदेश
पलवल
आर्य समाज पलवल शहर के तत्वावधान में दयानंद वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, पातली गेट पर चल रही वेद कथा में वैदिक ज्ञान की गंगा प्रवाहित हो रही है। कथा प्रातःकालीन सभा का शुभारंभ कन्या गुरुकुल बहरोला की छात्राओं द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण एवं प्रभु भक्ति के भजनों से किया गया। प्रातःकालीन सभा में मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा सरकार के पूर्व मंत्री सुभाष कत्याल ने शिरकत की। इस अवसर पर ब्लॉक समिति अध्यक्ष भगत सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष नगर परिषद कंवर रमेश कुमार, प्रेम प्रकाश मंदिर कैंप के संत सुमित जी महाराज, पूर्व पार्षद प्रेम सागर चावला सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यज्ञ के ब्रह्मा के रूप में आचार्य प्रमोद शास्त्री एवं ओम प्रकाश शास्त्री रहे। कथा में भारतवर्ष के सुविख्यात वैदिक विद्वान पंडित नरेश दत्त बिजनौरी ने वेद मंत्रों की सरल भाषा में व्याख्या की। उन्होंने कहा कि जैसे जीवात्मा दिखाई नहीं देती, लेकिन शरीर के माध्यम से कार्य करती है, वैसे ही निराकार परमात्मा सृष्टि के माध्यम से अपने अस्तित्व का बोध कराता है। वेद कहता है - "पश्य देवस्य काव्यं न ममार न जीयति" अर्थात उस परमात्मा की बनाई सृष्टि को देखो। कार्य को देखकर ही कर्ता का ज्ञान होता है। जो इस संपूर्ण संसार को बनाने वाला है, वही परमात्मा है, जिसे ओ३म् नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि वेद मनुष्य को दुर्गुण त्याग कर सद्गुण धारण करने की प्रेरणा देता है। जैसे कार खराब होने पर वर्कशॉप में ठीक कराते हैं, वैसे ही प्रार्थना के माध्यम से हम अपने दुर्गुणों को दूर कर सद्गुणों को धारण करते हैं। एक छेद से नाव डूब जाती है, वैसे ही एक दोष से मनुष्य का जीवन नष्ट हो जाता है। कार्यक्रम में मुख्य यजमान अर्जुन तनेजा एवं धीरज डेम्बला रहे। आर्य समाज के अध्यक्ष यशवीर सचदेवा, मंत्री अजय भाटी एवं केंद्रीय सभा के महामंत्री राजेश मंगला ने सभी का स्वागत किया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और बच्चे उपस्थित रहे।