यूजीसी के नए नियमों के विरोध में पलवल में सवर्ण समाज का हल्ला-बोल, बाजार रहे बंद
पलवल
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर सोमवार को पलवल में स्वर्ण संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मीनार गेट पर धरना देकर संगठनों ने इसे काला कानून बताते हुए बाजारों को पूर्णतः बंद रखा। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नए नियम संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन हैं। बिना प्रमाण की शिकायतों के आधार पर सामान्य वर्ग के छात्रों को अपराधी की तरह देखना सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रहा है और शिक्षा के क्षेत्र में जातिगत द्वेष व राजनीति को बढ़ावा दे रहा है। शिक्षा का मूल्यांकन योग्यता, परिश्रम और नैतिकता के आधार पर होना चाहिए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नए नियमों के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को जाति आधारित भेदभाव की शिकायत पर विशेष संरक्षण दिया गया है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को बिना सबूत की शिकायत पर भी कार्रवाई के खतरे में डाल दिया गया है। यदि शिकायत झूठी साबित होती है तो शिकायत कर्ता के विरुद्ध किसी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान न होना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। पूर्व विधायक नयनपाल रावत ने कहा कि यूजीसी कानून का देशभर में विरोध हो रहा है। आर्थिक आधार पर युवाओं को नौकरी के अवसर मिलने चाहिए और एससी-एसटी एक्ट में सुधार जरूरी है। सरकार को नए कानून में संशोधन करना चाहिए। स्वर्ण नेता संजय राणा ने कहा कि विरोध में पूरे देश का स्वर्ण समाज सड़कों पर है और सरकार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर इस कानून को समाप्त करना चाहिए। पूर्व नगर परिषद चेयरमैन कंवर रमेश ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कानून वापस नहीं लिया तो भाजपा को सत्ता से बाहर कर देंगे। वहीं राजेश्वर गर्ग ने कहा कि यह कानून किसी समुदाय ने नहीं मांगा, केंद्र सरकार ने जबरदस्ती थोपा है। वापस न लेने तक आंदोलन तेज रहेगा।