पलवल जिला किसान मोर्चा ने भारत अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
पलवल संयुक्त किसान मोर्चा के आह्ववान पर पलवल जिला किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने भारत अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ फरीदाबाद पहुंचकर केंद्रीय मंत्री और फरीदाबाद के सांसद कृष्ण पाल गुर्जर के कार्यालय पर प्रदर्शन कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। पलवल से किसान मोर्चे के नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, रूपराम तेवतिया, उदय सिंह सरपंच, ताराचंद प्रधान, दरयाब सिंह सौरोत, चरणजीत डागर, श्याम दत्त शर्मा नंबरदार, रमेश सौरोत, रामवीर चौहान, करण सिंह आर्य, समय राम कुंडू,महाराम रावत एडवोकेट, जगदीश आर्य, मेवाराम चौहान, चेतन प्रकाश शर्मा और खुर्शीद अहमद ने भाग लिया। किसान मोर्चा के नेताओं ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि आज पूरे देश में संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में भारत अमेरिका के साथ प्रस्तावित किसान मजदूर विरोधी ट्रेड डील के खिलाफ सभी सांसदों के आवास और कार्यालयों पर प्रदर्शन कर अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लागू न करने के लिए ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं क्योंकि यह व्यापार समझौता भारत के किसानों के साथ-साथ लघु सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।किसान नेताओं ने कहा अमेरिका के अंदर केवल 18 लाख 80 हजार व्यक्ति खेती करते हैं जो केवल 2% आबादी है जिन के पास औसत 469 एकड़ जमीन है और करीब 21 लाख रुपए प्रति व्यक्ति की सब्सिडी दी जाती है जबकि हिंदुस्तान में करीब 14.67 परिचालन जोत है और 48% जनता खेती से जुड़ी है। 65% जनता की निर्भरता खेती पर है। औसत एक कृषक परिवार के पास 2.68 एकड़ जमीन है केवल 34 हजार रुपए प्रति व्यक्ति औसत सब्सिडी दी जाती है। इस तरह से भारत के किसान किसी भी प्रकार अमेरिका से कंपटीशन नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में यह समझौता कर रहे हैं जो किसी भी प्रकार उचित नहीं है। अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने के बाद हिंदुस्तान की खेती और किसान जो पहले से ही संकट में है बिल्कुल बर्बाद हो जाएंगे इसलिए पूरे देश के किसान इस व्यापार समझौते का हर स्तर पर विरोध करेंगे।किसान नेताओं ने 20 जुलाई को दिल्ली जंतर मंतर पर देश के छात्रों और युवाओं पर किए गए बर्बर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि आंदोलनकारी युवकों से केंद्र सरकार वार्ता करके उनकी मांगों का समाधान करे।